मनखे के करनी के फर

           "मनखे के करनी के फर"

मनखे मन के करनी के फर,भोगत सबो परानी हे। सुक्खा परगे असाढ़ सावन,मुश्किल मा जिनगानी हे। मनखे खेलिस विनाश लीला,होरा भूँजिस छानी हे। आज भुँजावत हावय तेकर सेती हमर किसानी हे।।

पेड़ काट के मनखे मन हर,गजब करिन मनमानी हे। अँगरा लागत हावय रद्दा,दुरिहावत अब पानी हे।
बाढ़त हावय परदूषन हर,होवत बड़ बीमारी हे।
कहूँ बाढ़ अउ कहँचो सुक्खा,देखत दुनिया सारी हे।।

रुख-राई बिन भुइयाँ मा अब,मउसम बदले जावत हे। भुइयाँ के पानी हर संगी,दिन-दिन अब गहरावत हे।
चेतो अब सब मनखे मन हर,बिरवा चलव लगावव जी। मानसून हर रूठे हावय,जुरमिल चलव मनावव जी।।

             राम कुमार चन्द्रवंशी
              बेलरगोंदी(छुरिया)
             जिला-राजनांदगाँव
             9179798316
प्रकाशित दैनिक दावा RJN 24/7/2019

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