सुन सुन बादर
(त्रिभंगी छन्द)
"सुन-सुन बादर"
सुन-सुन तैं बादर,ओढ़े चादर,सुत झन ला तैं,घोर-घटा। जंगल-झाड़ी मा,अउ बाड़ी मा,ला दे तैंहर,खूब छटा। नरवा-नदिया मा,अउ तरिया मा,छलके पानी,खेत,कुँआ। आके नर-नारी,तोर दुवारी,माँगत हन हम,इही दुआ।।
तन-मन सितला दे,प्यास बुझा दे,रहय सबो के,होंठ खिले।
तड़पन झन जल बिन,ला दे सुख दिन,जम्मो हाथ ल,काम मिले।
चावल अउ तिलहन,सुग्घर दलहन,उपजे कुटकी,मूँगफली।
पउधा मा पतिया,महका बगिया,हँसय फूल के, कली-कली।।
वन नाच मयूरा,गाके भँवरा,मोहत सबके,चित्त रहय। मेंढक दे ताली,पंछी डाली,गावत झिंगुरा,गीत रहय।
झन कर मनमानी,आजा पानी,रुख-राई सब,फुले-फले। लागय भुइयाँ हर,हरियर-हरियर,घर-घर घी के,दीप जले।।
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी(छुरिया)
जिला-राजनांदगाँव
9179798316
प्रकाशित दैनिक दावा RJN 13/7/2019
Comments
Post a Comment