करम झन त्यागो
मुक्तामणि छन्द
"करम झन त्यागो"
करम करव जग में सदा,हिरदे रख खुशहाली।
फर मिलही पक्का हवे,आज नहीं ते काली।
बिना करम मनखे सदा,दीया जस बिन बाती।
कोसत रहिथे भाग नित,पीटत रहिथे छाती।।
बीते बात ल सोच के,जेहर समय गँवाथे।
जिनगी भर ओहर सदा,दर-दर ठोकर खाथे।
सपना अन्तस के सदा,अन्तस मा दब जाथे।
पुरखा के जोड़े सबो,दौलत नित उरकाथे।।
आलस जेहर त्यागथे,बीज करम के बोथे।
जिनगी के सपना सदा,ओकर पूरा होथे।
बिना करम संसार मा,किस्मत नइ हरियावै।
जावव ठीहा तीर जी,ठीहा हर नइ आवै।।
बने करम के फर बने,सबके मन हरषाथे।
जे करथे कारज बुरा,जिनगी भर पछताथे।
बोले बात 'कुमार'हर,छोड़ करम झन भागो।
नाम कमाना हे अगर,बने करम झन त्यागो।।
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी(छुरिया)
जिला-राजनांदगाँव
9179798316
प्रकाशित दैनिक दावा RJN 27/6/2019
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